Monday, April 13, 2015

one of the oldest school in mahagama block which was founded by a celebrated teacher of our area RAMNATH MODI
FONDLY REMEMBERED BY ALL
                                                                      LATE SHRI RAMNATH MODI
                                                                 (17 January 1940 – 4 December 2009)
आज हम सभी के लिए यह बहुत ही दुर्भाग्य का दिन है की इसी दिन 4 December 2004 को हमारे विद्यालय के संस्थापक सह पथप्रदर्शक स्व.रामनाथ मोदी हम सभी के कन्धों पर इतनी बड़ी जिम्मेवारी देकर, कर्त्तव्यपथ पर हम सभी को अकेला छोड़ कर ईश्वर में विलीन हो गए | अत्यंत शोकाकुल हृदय से पुरे विद्यालय परिवार की ओर से अपने सृजनकर्ता के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ | पूरा विद्यालय परिवार आज भी इनके बताये आदर्शों का अनुकरण कर रहा है तथा आगे भी करता रहेगा |
                                       एक शिक्षक अपने समाज के नवनिर्माण में क्या भूमिका अदा कर सकते हैं इस बात का जीवंत उदहारण स्व. रामनाथ मोदी सर थे | अपने पुरे जीवनकाल को उन्होंने समाज को शिक्षित करने में लगा दिया | सन 1960 से निरंतर अपने जीवन के आखिरी दिन 4 December 2009 तक वे समाज को शिक्षित करने में ही लगे रहे |आज न सिर्फ मैं बल्कि पुरे महागमा व आसपास के क्षेत्र के वे सभी पूर्व छात्र जो देश के विभिन्न क्षेत्रोँ में विभिन्न भूमिकाओं में देशसेवा में कार्यरत हैं , वे सभी स्व.मोदी सर के आजीवन ऋणी बने रहेंगें | आज पूरे महागामा तथा हमारे आसपास के क्षेत्र में लगभग शायद ही कोई ऐसा गली मोहल्ला हो जहाँ इनके कोई न कोई पूर्व छात्र न हों | अपने शिक्षण कार्य के लिए वे अत्यंत ही लोकप्रिय थे | एक व्यक्ति जिसने अपने जीवन में  अशिक्षा के कारण होने वाले कष्टों को स्वयं झेले तथा महसूस किया और फिर वही शिक्षा को समाज में फैलाना ही उनके जीवन का उद्देश्य बन गया वास्तव में यह किसी महान समाजसेवी की परिकल्पना को ही परिलक्षित करता है |
सन 1960-61 के लगभग इन्होंने राम लखन सिंह उच्च विद्यालय कुरमीचक , गोड्डा में निजी शिक्षक के तौर पर नियुक्त हुए | इनके ही अथक प्रयासों से 21 November 1968 तत्कालीन बिहार सरकार द्वारा विद्यालय को मंजूरी प्रदान की गयी | वहीँ के विद्यार्थियों द्वारा दिया गया ‘’प्रशिस्ती पत्र ‘’ आज भी उनकी कर्मठता तथा कर्तव्यपरायणता का उदहारण देता है | अक्टूबर 1980 में ये ट्रांसफ़र होकर जय नारायण उच्च विद्यालय महागामा में सहायक अंग्रेजी शिक्षक के तौर पर आये | अपने सेवाकाल के दौरान ही इन्होंने M.P.ADARSH SHISHU GYAN NIKETAN MAHAGAMA की नीवं रखी | बाद में सेवानिवृत्त के बाद ये पूर्ण रूप से अपना शेष जीवन इस विद्यालय को ही समर्पित कर दिए | इनका पूरा जीवनवृत्त व शिक्षा के प्रति समर्पण भाव , किसी महापुरुष के जीवन की तरह ही प्रतीत होता है |
                                       उनका शिक्षा के प्रति समर्पण बस इसी बात से जाहिर हो जाता है की उनका  58 वर्ष का शिक्षणकाल उनके मृत्यु के ठीक एक दिन पहले तक अनवरत रूप से चलता रहा | उनके बताये सिद्धांतो व आदर्शो पर आज हम सभी उनके बच्चे व पूरा विद्यालय परिवार अग्रसर है | स्व रामनाथ मोदी द्वारा अंकुरित इस  विद्यालय रूपी वृक्ष की क्षत्र छाया में आज भी पूरा समाज लाभान्वित हो रहा है ...............
एक बार पुनः हम सभी अपने सृजनकर्ता के प्रति अत्यंत अश्रुपूर्ण नेत्रों से श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं तथा उनके आदर्शो पर चलने की शपथ लेते हैं ............................................